प्रोबेशन अवधि में कर्मचारियों को मिलेगा पूरा वेतन, मध्यप्रदेश हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला
जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य के हजारों शासकीय कर्मचारियों को बड़ी राहत देते हुए एक ऐतिहासिक और कर्मचारी-हितैषी फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि प्रोबेशन (परिवीक्षा) अवधि में काम कर रहे कर्मचारियों को 100 प्रतिशत वेतन दिया जाना अनिवार्य है। इसके साथ ही कोर्ट ने राज्य सरकार के उस नियम को भी रद्द कर दिया है, जिसके तहत प्रोबेशन काल में कर्मचारियों को कम वेतन दिया जा रहा था।
क्या था पुराना नियम?
राज्य शासन के सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) द्वारा वर्ष 2019 में एक परिपत्र जारी किया गया था। इस परिपत्र के अनुसार—
- पहले वर्ष में कर्मचारियों को केवल 70% वेतन
- दूसरे वर्ष में 80% वेतन
- तीसरे वर्ष में 90% वेतन
इस नियम के कारण हजारों नए नियुक्त कर्मचारियों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था।
हाईकोर्ट ने क्यों रद्द किया नियम?
इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति दीपक खोत की खंडपीठ ने की। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि—
“जब कोई कर्मचारी प्रोबेशन अवधि में भी वही काम कर रहा है, वही जिम्मेदारियाँ निभा रहा है, जो एक स्थायी कर्मचारी करता है, तो उसे पूरा वेतन न देना संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन है।”
कोर्ट ने यह भी कहा कि “समान काम के लिए समान वेतन” का सिद्धांत प्रोबेशन कर्मचारियों पर भी पूरी तरह लागू होता है।
कर्मचारियों की दलील
याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि प्रोबेशन अवधि के दौरान भी—
- कार्य का समय समान होता है
- जिम्मेदारियाँ समान होती हैं
- विभागीय दबाव और जवाबदेही भी समान होती है
ऐसे में केवल प्रोबेशन के नाम पर वेतन में कटौती अन्यायपूर्ण और भेदभावपूर्ण है।
हाईकोर्ट का स्पष्ट आदेश
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश देते हुए कहा कि—
- अब से सभी प्रोबेशन कर्मचारियों को 100% वेतन दिया जाए
- जिन कर्मचारियों को पूर्व में कम वेतन दिया गया है, उन्हें बकाया (एरियर) का भुगतान किया जाए
- GAD का 2019 का परिपत्र तुरंत प्रभाव से निरस्त माना जाए
हजारों कर्मचारियों को मिलेगा लाभ
इस फैसले से—
- शिक्षक
- पटवारी
- क्लर्क
- पुलिसकर्मी
- अन्य विभागों में नई नियुक्ति पाने वाले कर्मचारी
सभी को सीधा लाभ मिलेगा। इससे राज्य के हजारों परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।
कर्मचारी संगठनों में खुशी
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद कर्मचारी संगठनों में खुशी की लहर है। संगठनों ने इसे—
- कर्मचारियों की जीत
- न्यायपालिका का साहसिक कदम
- सरकार के गलत निर्णय पर करारा जवाब बताया है।
सरकार पर बढ़ेगा आर्थिक भार
हालाँकि इस निर्णय से राज्य सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ेगा, लेकिन कोर्ट ने साफ कहा कि कर्मचारियों के अधिकारों से समझौता नहीं किया जा सकता।
निष्कर्ष
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट का यह फैसला न केवल राज्य के कर्मचारियों के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए एक मिसाल बन सकता है। यह निर्णय यह साबित करता है कि—
“काम पूरा हो तो वेतन भी पूरा होना चाहिए।”



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